
दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में 220 से अधिक अध्येता कर रहे सहभागिता
अम्बिकापुर। International Seminar: रिसर्च का तात्पर्य है पुन: खोजना। प्रकृति की प्रदत्त सुविधाओं, तथ्यों को दोबरा परखना और उसे मानव मूल्यों के लिए तैयार करना है। यह बातें शुक्रवार को श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में इर्मजिंग ट्रेंड ऑफ रिसर्च इन साईंस विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्य अतिथि संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय के कुलपति राजेन्द्र लाकपाले ने कही।
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रिसर्च का लक्ष्य मानव कल्याण हो

प्रो. लाकपाले ने कहा कि मनुष्य के लिये अन्वेषण उसके स्वभाव में है, उसे अपनी सुविधाओं के लिए हमेशा नया चाहिए। डॉ. लाकपाले ने कहा कि रिसर्च का लक्ष्य मानवता का कल्याण होना चाहिए जो प्रयोगशालाओं से निकलकर समाज में पहुंचे। बेसिक रिसर्च और एप्लाइड रिसर्च दोनों समाज के लिए काम करते हैं। विज्ञान की आधुनिक शाखायें विकास को नये आयाम देती हैं। उन्होंने जीन डिलीवर, नैनो पार्टिकल, ब्लड कैंसर, मशीन लर्निंग, डेटा एनालसिस, स्नो बायोलाजी, ग्रीन हाइड्रोन आदि तथ्यों से अवगत कराया। उन्होंने सेमिनार के सफल आयोजन के लिए शुभकामना दी।
अनुसंधान और नवाचार पर विचार-विमर्श
इससे पहले अतिथियों ने मां सरस्वती और श्री साई नाथ की तस्वीर पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों को स्वागत बैच लगा कर तथा पुष्प गुच्छ प्रदान कर किया गया। सेमिनार का विषय प्रवर्तन करते हुए कन्वीनर डॉ. शैलेष देवांगन ने कहा कि हाइब्रिड मोड में आयोजित सेमिनार में विज्ञान की विविध शाखाओं और उनके अनुसंधान और नवाचार पर विचार-विमर्श होगा। देश और विदेश के 220 से अधिक प्रतिभाग दो दिनों में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
बढ़ रहा विज्ञान का दायरा

अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि दिनोंदिन विज्ञान का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसमें प्रबंधन, प्रोद्यौगिकी के साथ जीवन का प्रत्येक पल समाया हुआ है। उन्होंने एआई, मशीन लर्निंग और साफ्टवेयर के प्रयोग और उसकी उपादेयता से अवगत कराया। समाज की वास्तविक समस्या को जानना और जनता की सेवा में लगाना ही ध्येय है, इसी लक्ष्य का लेकर अंतर्राष्ट्रीय फलक पर विद्वानों को जोड़ा है।
शासी निकाय के अध्यक्ष विजय कुमार इंगोले ने सेमिनार की सफलता का शुभकामना देते हुए कहा कि हमें मानव जाति की उन्नति के लिए काम करना है। एआई, टूल्स हमारे सहयोगी होंगे, हम उनके गुलाम नहीं बनेंगे। शोध, अनुसंधान से मनुष्य को मजबूत बनाना है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि निवर्तमान कुलपति प्रो. पीपी सिंह ने कहा कि आदिवासी अंचल के लिए उच्च शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।
पुस्तक का हुआ विमोचन

सेमिनार को विषय केन्द्रित विषय होना चाहिए जिससे एक दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा। डॉ. सिंह ने कहा कि बिना शोध के उच्च शिक्षा का कोई अस्तित्व नहीं है। उन्होंने वर्तमान कुलपित राजेन्द्र लाकपाले से एक विशेष विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित कराने का आग्रह किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए स्कूल शिक्षा के संयुक्त संचालक राजेश सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए प्राध्यापकों में स्थायित्व का भाव होना जरूरी है।
अस्थिरता से डर का असर दिखता है। उन्होंने महाविद्यालय परिसर के शैक्षिक, अनुशासित परिवेश को बनाये रखने का आह्वान किया।
अतिथियों ने इस अवसर पर सेमिनार का सोवेनियर तथा जन्तु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एलपी गुप्ता की पुस्तक कार्डेट्स की विविधता एवं तुलनात्मक शारीरिक रचना का विमोचन किया। अतिथियों को शाल, श्रीफल तथा स्मृति चिह्न प्रदान का सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र का संचालन सहायक प्राध्यापक देवेन्द्र दास सोनवानी और पल्लवी मुखर्जी ने किया। अतिथियों का आभार रसायन विज्ञान विभाग की अध्यक्ष गीता चौहान ने प्रकट किया। उद्घाटन सत्र के दौरान एनईपी प्रभारी डॉ. आरएन शर्मा, लाइफ साईंस विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरविन्द तिवारी, कम्प्यूटर एवं आईटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, वाणिज्य एवं प्रबंध विभाग के प्रभारी अध्यक्ष डॉ. जसप्रीत कौर, शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश शाक्य तथा सभी शोध अध्येता और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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