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Drone Warfare: सेना में शामिल किए जाएंगे ₹5,000 करोड़ के स्वदेशी ड्रोन, इन खास तरीकों से निपटेंगे दुश्मन से

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नई दिल्ली 15 दिसंबर 2025। Drone Warfare:  ऑपरेशन सिन्दूर की अपार सफलता के बाद भारतीय सेना खुद को और मजबूत कर रही है। वह अपने बेड़े में स्वेदेशी ड्रोनों  की संख्या बढ़ा रही है। इसके लिए उसने स्वदेशी कंपनियों को 5 हजार करोड़ रुपए की कीमत का आर्डर दिया है। ये कंपनियां सरकारी प्राइवेट दोनों हैं।

कड़ी टेस्टिंग के बाद दिया गया आर्डर

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ये ड्रोन दुश्मन की तरफ से उत्पन्न की जाने वाली स्पूफिंग और जैमिंग से निपटने में सक्षम होंगे। सेना ने इन  ड्रोनों का आर्डर देने से पहले टेस्टिंग के लिए ऑपरेशन सिन्दूर वाली परिस्थितियों को रिक्रिएट किया।  खरीदारी से पहले सेना ने ऑपरेशन सिंदूर वाली परिस्थितियां रीक्रियेट करके ऐसे ड्रोनों की कड़ी टेस्टिंग की है।

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एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना जिन ड्रोनों को खरीदने जा रही है, उनमें  शार्ट रेंज के कमिकेज स्ट्राइक वाले ड्रोन से लेकर लॉन्ग रेंज वाले ड्रोन भी शामिल हैं। आर्डर में शामिल प्रिसाइज म्युनिशन वाले ड्रोन भी शामिल है जो लॉन्ग रेंज में सटीक हमला करने में सक्षम हैं। पहले इस तरह के ड्रोन होते हैं, जो मिशन को अंजाम देने केबाद नष्ट हो जाते हैं, जबकि दूसरे ड्रोन ऐसे हैं जो लंबी दूरी तक जाकर टारगेट की पहचान करते हैं और फिर उन्हें नष्ट करके वापस लौटने में सक्षम बनाए गए हैं।

आपात शक्तियों का किया गया इस्तेमाल

वहीं तीसरे तरह के यूएवी में वो वाले ड्रोन हैं जो जासूसी के काम में इस्तेमाल किये जाते हैं। सेना द्वारा जिन ड्रोनों की टेस्टिंग की गई है, उनमें चाइनीज पार्ट के लिए होने वाली स्क्रीनिंग भी शामिल है। सेना के सूत्रों का कहना है कि,आपात काल के लिए बनाई गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सेना इन ड्रोनों की खरीदारी कर रही है। सेना को इन आपात शक्तियों की मंजूरी ऑपरेशन सिन्दूर के बाद दी गई थी।

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ये भी बताया जा रहा है कि, सेना में अधिक से अधिक ड्रोन शामिल करने का मुख्य मकसद है दुश्मन के ऐसे ड्रोनों का पता लगाना है जो स्पूफिंग और जैमिंग वाले मुश्किल माहौल में भी बेहतर रिजल्ट देने में सक्षम हों।सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान सेना को इस तरह की परिस्थितियों का सामना पड़ा था। इसके बाद इस बात की गहन छानबीन की गई है कि,  इनके लिए चाइनीज पार्ट का इस्तेमाल न नहीं गया हो।

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टेस्टिंग के लिए बनाया गया वार फेयर एरिया

ड्रोनों की पहचान के लिए सेना तरफ से जो टेस्टिंग की गई उसके लिए एक खास तरह का वार फेयर टेस्टिंग एरिया बनाया गया था, जहां ड्रोनों को ऐसी मुश्किल जैमिंग वाली स्थितियों का सामना कराया गया, जो ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान उत्पन्न हुई थीं। इसी दौरान टेस्टिंग टीम ने इस बात की भी पड़ताल की ये ड्रोन ऊंचाई वाली जगहों पर भी बेहतर रिजल्ट देने में सक्षम हो।

इन कंपनियों को दिए गये आर्डर

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वार फेयर एरिया में ही म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड ने शानदार प्रदर्शन किया और लोइटरिंग म्यूनिशन्स के लिए लगभग 500 करोड़ रूपये के कॉन्ट्रैक्ट प्राप्त कर लिया। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के लिए यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

अब बात करें अगर निजी क्षेत्र की तो न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज और एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड ने संयुक्त रूप से सर्विलांस और कामिकाज स्ट्राइक ड्रोन के लिए   करीब 725 करोड़ रुपये का कांट्रेक्ट  हासिल किया। इनके अलावा आइडियाफोर्ज और जेएसडब्ल्यू ने भी अलग-अलग तरह के यूएवी के लिए ठेका हासिल किया। इनमें पहले ने सर्विलांस ड्रोन में बाजी मारी तो दूसरे ने वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग में माहिर ड्रोन के क्षेत्र में अपना दबदबा कायम किया।
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