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Iran-Israel Conflcit: इजराइल-ईरान संघर्ष में चीन की एंट्री से टेंशन में आया US, पुतिन ने भी दी धमकी

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नई दिल्ली। Iran-Israel Conflcit: इजराइल-ईरान संघर्ष इस समय चरम पर है। दोनों देश एक-दूसरे पर धुआंधार मिसाइलें बरसा रहे हैं। दोनों देशों में भीषण तबाही मची हुई है। वहीं, अब एक रिपोर्ट आ रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि, इस लड़ाई में चीन ने भी चुपचाप एंट्री ले ली है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में चीन के तीन कार्गो प्लेन ईरान पहुंच चुके हैं, जबकि जंग की वजह से ईरान के एयर स्पेस बंद थे, लेकिन चीन के कार्गो प्लेन को वहां लैंड कराया गया। बताया जा रहा है कि, इन विमानों का रूट शंघाई से होते हुए लग्जमबर्ग था, लेकिन मिड-एयर इन एयरक्राफ्ट ने अपने ट्रांसपोर्डर और सेंसर स्विच ऑफ कर दिया और ईरान की एयर स्पेस में उतरे।

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ईरान पहुंचे चीन के कार्गो प्लेन

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हालांकि, इन एयर क्राफ्ट में क्या था, इसका पता अभी नहीं चल पाया है। बस कयास लगाया जा रहा है कि, चीन ने ईरान को या तो हथियार उपलब्ध कराया है या फिर एयर डिफेन्स सिस्टम दिया। इधर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी है कि, वह ईरान-इजराइल युद्ध में न कूदे।  रूस ने कहा, अगर अमेरिका इस जंग में इजराइल की तरफ से आता है, तो वह और चीन ईरान के सीधे तौर खड़े नजर आएंगे।

सीमा के पास से गायब हुए रडार से

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FlightRadar24 के डेटा पर गौर करें, तो बीते 14 जून से अब तक यानी छह दिन में लगभग 5 बोइंग 747 विमान चीन के उत्तरी भागों से उड़ान भरकर ईरान की सीमा में दाखिल हुए हैं। हालांकि, इन विमानों का रूट सामान्यत लग्जमबर्ग दिख रहा है, लेकिन ये एक बार भी यूरोपीय हवाई क्षेत्र में दाखिल नहीं हुए। रिपोर्ट के अनुसार, इन विमानों ने कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान की सीमा को पार किया और फिर  ईरान की सीमा के पास रडार से गायब हो गए। ये सभी कार्गो विमान ट्रांसपोंडर ऑफ कर चुके थे, जो सामान्य तौर पर सैन्य या खुफिया उड़ानों की तरफ इशारा करते हैं, जिससे संदेह जताया जा रहा है कि, ये विमान हथियार, सामरिक उपकरण या फिर सुरक्षा बलों को लेकर ईरान गए होंगे।

25 साल की रणनीतिक डील हुई है

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बता दें कि, चीन-ईरान के बीच साल 2021 में 25 साल की एक रणनीतिक सहयोग डील हुई थी, जिसके तहत उस वक्त  ईरान को चीन से 400 अरब डॉलर का निवेश मिलना तय हुआ था। इसके बदले में ईरान से चीन को सस्ते दाम में तेल और गैस सप्लाई मिलने की बात हुई थी। इसके अलावा दोनों देशों ने सैन्य तकनीक ट्रांसफर,साइबर डिफेंस सहयोग, इंटेलिजेंस साझेदारी और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट समझौता किया था।

 

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