
नई दिल्ली। Indian Army: सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेने और उन्हें धूल चटाने वाली भारतीय सेना अब और ताकतवर होने वाली है। इसके लिए जल्द ही 382 इन्फैंट्री बटालियन में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बटालियन के जवानों को और अधिक आक्रामक बनाने के लिए उन्हें कई आधुनिक हथियारों जैसे कि, स्नाइपर राइफल, मशीन गन, लोइटरिंग गोला-बारूद,कार्बाइन, सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो, रॉकेट-लॉन्चर और टैंक-किलिंग मिसाइल आदि से स्पेशल ट्रेनिंग देने की तैयारी की गई है। इस हथियारों को चलाने में दक्ष सेना के जवान सीमा पर खतरनाक से खतरनाक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे।
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इन्फैंट्री बटालियन को करना पड़ता है कई चुनौतियों का सामना

इस बारे में जानकारी देते हुए पैदल सेना के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने बताया कि, हमारा मुख्य उद्देश्य पैदल सैनिकों (इन्फैंट्री बटालियन) को अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित करना, उनका कौशल और उनकी क्षमता को बढ़ाना है क्योंकि इन्फैंट्री बटालियन को आये दिन बड़े लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और हॉवित्जर तोपों का सामना करना पड़ता है और इस लड़ाई में उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि, हम उन्हें इस तकनीक से लैस करना चाहते हैं ताकि वे दुश्मन के आधुनिक से आधुनिक हथियारों के हमले का कुशलता से जवाब दे सकें।
सबसे बड़ी शाखा है पैदल सेना
लेफ्टिनेंट जनरल कुमार ने बताया, भारतीय सेना में 11.5 लाख से अधिक सैनिक हैं, जिनमें पैदल सेना अब तक की सबसे बड़ी शाखा है। उन्होंने कहा, जमीन पर सैनिक तैनात करना हमेशा प्रासंगिक रहेगा क्योंकि संघर्षों में जीत, चाहे वह रूस-यूक्रेन हो या इजरायल-हमास, कब्जा की गई भूमि या अचल संपत्ति की मात्रा से मापी जाती रहेगी।
इन हथियारों की हो रही खरीद

लेफ्टिनेंट जनरल के अनुसार, इन्फैंट्री बटालियन को आधुनिक हथियारों से सुसज्जित करने के मकसद से ही सेना ने आईएसआर (खुफिया, निगरानी, टोही) ड्रोन, सटीक हमलों के लिए लोइटरिंग गोला-बारूद, बुलेट-प्रूफ जैकेट, बैलिस्टिक हेलमेट, कामिकेज ड्रोन, पर्ण-भेदन रडार, नाइट साइट्स, लाइट स्पेशलिस्ट और ऑल-टेरेन व्हीकल्स, आदि के लिए कई तरह के सौदे किए हैं। सबसे नया सौदा 4.2 लाख क्लोज़-क्वार्टर बैटल कार्बाइन का है, जिसकी कीमत 2,770 करोड़ रुपये है। इसका 60% भारत फोर्ज द्वारा और शेष पीएलआर सिस्टम्स (अडानी डिफेंस-इज़राइल वेपन इंडस्ट्रीज का संयुक्त उद्यम) द्वारा निर्मित किया जाएगा।
अमेरिका से खरीदी जा रही मिसाइल

अजय कुमार ने बताया कि, आने वाले दो सालों में सारे सैन्य सामनों की डिलीवरी हो जाएगी। इसके अलावा, नई पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों की भारी कमी को देखते हुए, जब तक स्वदेशी विकल्प उपलब्ध नहीं हो जाते हैं तब तक लॉन्चरों और मिसाइलों की भी आपातकालीन खरीद की जा रही है। इसी कड़ी में 12 जैवलिन लॉन्चरों और 104 मिसाइलों की खरीद अमेरिका से की जा रही है।
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