
नई दिल्ली। Jagdeep Dhangarh Resignation: संसद का मानसून सत्र शुरू होने से महज एक दिन पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनगढ़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। हालांकि, उपराष्ट्रपति ने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य समस्या बताई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कोई भी इसे सही वजह मानने को तैयार नहीं है। यहां हैरान वाली बात ये भी है कि, राज्यसभा के सभापति के इस्तीफे के कई घंट बाद तक भी सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। वहीं, विपक्ष ने इस पर हैरानी जताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
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तेज हुआ कयासों का दौर

धनगढ़ के इस्तीफे की असली वजह अभी तक सामने नहीं आई है, जिससे कयासों का दौर तेज हो गया है। कोई उनकी बेबाकी को वजह बता रहा है, तो कोई विपक्ष से बढ़ रही उनकी नजदीकियों को। ये भी कयास लगाया जा रहा है कि, इस्तीफे की वजह न्यायपालिका और सरकार की नीतियों के खिलाफ उनके द्वारा दिए जा रहे उनके सख्त बयान हैं। वहीं, एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, धनगढ़ के इस्तीफे का मुख्य कारण जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग के मुद्दे पर हाल में सरकार के वरिष्ठ मंत्री के साथ हुई उनकी गरमा गरम बहस है।
केंद्र सरकार के मंत्री से हुई थी बहस
रिपोर्ट में बताया गया है कि, सोमवार की शाम को उपराष्ट्रपति जगदीप धनगढ़ की केंद्र सरकार के एक मंत्री से फोन पर तीखी बहस हुई थी। इस बहस में कैश कांड के कथित आरोपी जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ 65 से अधिक विपक्ष के सांसदों की तरफ से पेश किये गये महाभियोग के प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले पर सवाल उठाया गया था।
धनगढ़ ने हवाला दिया कि, उन्होंने राज्यसभा के सभापति के तौर पर अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए महाभियोग के प्रस्ताव को स्वीकार किया है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि, सरकार इस कदम से बेखबर थी। इसके बाद उपराष्ट्रपति की तरफ से शाम 4:30 बजे से बुलाई गई बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू शामिल नहीं हुए, जिससे तनाव और बढ़ गया, जिससे स्पष्ट हो रहा है कि, सरकार और धनगढ़ के बीच विवाद गहरा गया था।
सामने आया था खरगे का वीडियो
इससे पहले 15 जुलाई को उपराष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का 44 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था, जिसमें वे वी. पी. एंक्लेव में जगदीप धनगढ़ से मुलाकात करते नजर आ रहे थे। इसके अलावा जगदीप धनगढ़ ने संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले यानी बीते रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविन्द केजरीवाल से मुलाकात की, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर की गई। खास बात ये है कि, केजरीवाल सांसद नहीं है। वैसे तो दोनों नेताओं से हुई ये मुलाकात शिष्टाचार का हिस्सा है, लेकिन कहा जा रहा है कि, इन मुलाकातों में धनगढ़ ने मोदी सरकार की तीखी आलोचना की थी।
Former Chief Minister of the National Capital Territory (NCT) of Delhi, Shri Arvind Kejriwal ji along with Floor Leader of Aam Aadmi Party (AAP) in the Rajya Sabha, Shri Sanjay Singh ji, called on the Hon’ble Vice-President of India, Shri Jagdeep Dhankhar at the Vice-President’s… pic.twitter.com/zJVVeHlj30
— Vice-President of India (@VPIndia) July 20, 2025
Shri Mallikarjun Kharge Ji, Hon’ble Leader of Opposition (Rajya Sabha) called on Hon’ble Vice-President and Chairman, Rajya Sabha, Shri Jagdeep Dhankhar at Vice-President’s Enclave today. #RajyaSabha @kharge pic.twitter.com/j9xM3DorT4
— Vice-President of India (@VPIndia) July 15, 2025
विपक्ष ने उठाए सवाल
बता दें कि, वर्तमान की स्थिति 2024 से काफी अलग है। 2024 में विपक्ष ने जगदीप धनगढ़ के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया था और उन पर पक्षपात पूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए राज्यसभा के सभापति के पद से हटाने की धमकी दी थी, लेकिन मार्च 2025 के बाद से धनगढ़ विपक्ष के साथ अपने संबंध बेहतर करने लगे थे, ताकि राज्यसभा के सभापति के तौर पर उनके पक्षपातपूर्ण रवैये के दावों को झूठा साबित किया जा सके।
जगदीप धनगढ़ अक्सर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे और जयराम रमेश के साथ-साथ कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी से भी मुलाकात करते रहे। अब जयराम रमेश और प्रमोद तिवारी खुद आगे बढ़ कर सवाल उठा रहे हैं कि, धनखड़ ने अचानक इस्तीफा क्यों दिया। इसके साथ ही इन लोगों ने सरकार से मांग की है कि, वह उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाए।
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