
दालचीनी (cinnamon) भारत में लगभग हर घर में इस्तेमाल किया जाने वाला एक मसाला है। यह न केवल अपने स्वाद और सुगंध के लिए बल्कि अपने स्वास्थ्य लाभों के लिए भी जाना जाता है। यह मसाला रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने, पाचन में सुधार करने और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में इसके नाम पर धोखा हुआ है। हर दिन करोड़ों भारतीय इस धोखे का शिकार होते हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा माजरा…
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सेहत के लिए नुकसानदायक होती है असली दालचीनी
दरअसल, आप जिस मसाले को दालचीनी समझकर सालों से खा रहे हैं, वह दालचीनी नहीं कुछ और है। इसे कैस्टर शेल कहा जाता है। इसका रूप, गंध और स्वाद दालचीनी जैसा ही होता है, लेकिन ये असली दालचीनी नहीं है। ये एक ऐसी चीज है जिसके सेवन से आप गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं। बाजार में इसकी कीमत दालचीनी से काफी सस्ती होती है। ऊपर दी गई तस्वीर में आप दोनों के बीच का अंतर साफ देख सकते हैं।
दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर
कास्टर शेल (Cassia) और असली दालचीनी (Cinnamomum verum) के बीच कई अंतर होते हैं। सबसे बड़ा अंतर यह है कि दोनों अलग-अलग पेड़ों से प्राप्त किये जाते हैं। कस्टर शेल का पेड़ Cinnamomum cassia परिवार से जुड़ा होता है, लेकिन असली दालचीनी का पेड़ Cinnamomum verum परिवार से संबंधित है। इन दोनों के रासायनिक गुणों में भी बड़ा अंतर होता है। कस्टर शेल यानी Cassia में कुमरिन की मात्रा अधिक पाई जाती है। वहीं असली दालचीनी यानी Cinnamomum verum में कुमरिन की मात्रा कम पाई जाती है।
लीवर और किडनी पर डालती हैं असर
बता दें कि Coumarin एक रासायनिक यौगिक है जो आमतौर पर जड़ी-बूटियों और मसालों में पाया जाता है, लेकि इसकी अधिक मात्रा शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से लीवर और किडनी पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
कैसे करें असली-नकली की पहचान
जब आप दालचीनी का पैकेट खरीदते हैं, तो पैकेट पर “दालचीनी” लिखा होता है। दूसरी ओर जो नकली दालचीनी का पैकेट होगा उस पर Cassia लिखा होगा। हालांकि, यह सुविधा खुली दालचीनी में नहीं मिल पाती है। अगर आप खुली दालचीनी खरीदते हैं तो आप इसे देखकर पहचान सकते हैं। इन्हें इनके रंग और गंध से भी पहचाना जा सकता है। दरअसल, असली दालचीनी का रंग हल्का भूरा होता है, जबकि नकली दालचीनी का रंग गहरा भूरा हो सकता है। वहीं जब आप इसे छूएंगे, तो आपके हाथ नकली दालचीनी के रंग छूटेंगे क्योंकि कई बार उस पर रंग चढ़ाया जाता है जबकि असली दालचीनी का रंग हाथ में नहीं लगता है।
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